कुछ कही कुछ अनकही

सुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

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माना कि बदलना शर्त है जिंदगी की…..

Posted On 19 Nov, 2017 में

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माना बदलना शर्त है जिंदगी की
पर कुछ तो जैसा है वैसा रहना चाहिए

बदले और हम कितना तेरे लिए
कुछ तो मुझमें भी मेरे जैसा रहना चाहिए

दीगर हैं यह बात के आप क्या है
सब के सामने आपको अच्छा रहना चाहिए

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