कुछ कही कुछ अनकही

सुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

175 Posts

167 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 13246 postid : 1321209

पूछना है तुझसे बस इक सवाल यही "contest "

Posted On: 28 Mar, 2017 Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पूछना है आज तुझसे बस इक सवाल यही /
मुझे बनाने वाले /
क्यों दी नजाकत की सौगात मुझे ?
जब चलना ही था कठोर कंटीली राहों पर /
क्यों दी मुझे उड़ानें उम्मीदों की ,आशाओं की ?
जब मेरी परवाजों की किस्मत में तो ताले ही लिखे थे /
क्यों बहाये हृदय में मेरे भावनाओं के सागर ?
जब मुझे तो सूखे सेहराओं में ही जीना था /
क्यों बसाये वो सुनहरे सपने मेरे नयनों में ?
जब दिन का उजाला ही नहीं उन सपनों के नसीब में था /
क्यों मेरे हृदय को जकड़ दिया नेह और ममता की उस डोर से?
जो बन गई बेड़िया मेरे ही पैरों की/
क्यों मेरे कन्धों पर रिश्तों को भी ढ़ोने का भार डाला /
जिनको चुनने का हक़ भी मुझे नहीं था ?
क्यों मुझे समझ का तोहफा दिया तूने /
जब मुझसे मुतालिक फैसले करने तो औरों को ही थे /
क्यों दिखाए सपने उस जीवन के मुझे ?
जिस को देने वाले ही मुझे कत्ल कर रहे अपने ही हाथों से /
बन कर रह गया है क्यों?
जीवन मेरा अनवरत संघर्षों की एक दास्ताँ /
सोचता तो होगा तू भी कभी तो /
मुझको बनाने वाले /
जीवन को सुंदर बनाने वाली तेरी ही इस रचना का /
सृष्टि में सृजन का योगदान देने वाली नारी का /
सुख दुःख में मानव के साथ निभाने वाली नारी का/
वज़ूद तार तार हो रहा सरे आम क्यूँ ?
अपने अस्तित्व की अस्मिता पर वह सवाल कर रही है क्यूँ ?
सोचता तो होगा तू भी कभी तो /
मुझको बनाने वाले ……….



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

5 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mrssarojsingh के द्वारा
March 29, 2017

आपका बहुत बहुत धन्यवाद sarita ji जी आप और हम अक्सर ऐसे पलों से रूबरू होते रहते हैं जिंदगी में , ऐसे में यह अल्फ़ाज़ ही हमें थोड़ा सहारा देते हैं और हिम्मत देते हैं आप जैसे साथी भी …….. आगे भी साथ रहने की उम्मीद के साथ सरोज

sinsera के द्वारा
March 29, 2017

बड़ी भावुक कविता है सरोज जी और यथार्थ भी ..

    mrssarojsingh के द्वारा
    March 29, 2017

    आपका बहुत बहुत धन्यवाद sarita ji जी हम और आप सभी ऐसे ही कुछ पलों से अक्सर रूबरू होते है तब यह अल्फ़ाज़ ही हमारा सहारा बनते हैं और आप जैसे साथी थोड़ी और हिम्मत देते हैं आगे भी ऐसा साथ मिलता रहेगा इसी उम्मीद के साथ .. सरोज

Shobha के द्वारा
March 28, 2017

प्रिय सरोज जी सुंदर भाव पूर्ण कविता क्यों दी नजाकत की सौगात मुझे ? जब चलना ही था कठोर कंटीली राहों पर /

    mrssarojsingh के द्वारा
    March 29, 2017

    हौंसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद,, आदरणीय शोभाजी . आशा है आप आगे भी यूँ ही अपने विचार साझा करती रहेंगी .


topic of the week



latest from jagran