कुछ कही कुछ अनकही

सुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

175 Posts

167 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 13246 postid : 1318431

अक्सर ................

Posted On: 10 Mar, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अक्सर

अक्सर ………………..
कई लम्हे
बेमानी .,बेपता ,बेस्वाद
बिन चेहरे के
बेनिशां से
रूह की ज़मीं पर
खामोश
उदास
बिन आहट के
बिना कोई निशां छोड़े
चुपके से गुजर जाते है
गोया , गुजरा हो
सेहरा के रेत पर से कोई
अक्सर …………….
गुजरे हुए लम्हे
पुराने वक्त की यादों का
पुलिंदा अपनी झोली में ले कर चले आते है
जिसमें
होते हैं
उदासियों के सूखे पत्ते
अश्कों की बारिशें
सही गलत फैसलो के कुछ कांटें कुछ फूल
कुछ गलतियों के शूल
बिछड़े अपनों के चेहरे
सामने ले आते हैं
फिर से उस
उस दर्द को जीने को मजबूर कर देते है
जो दिल के कोने में कही सो रहा था
अक्सर
वो लम्हे जो धुंध में हैं अभी
अपनी एक झलक दिखा कर फिर धुंध में खो जाते हैं
मृगमरीचिका की मानिंद
अपने पीछे बुला कर
एक ऐसे
अधबुने पुल पर ला कर छोड़ देते हैं
जिसके आगे कोई राह नही
कोई गली नहीं
बस घनी धुंध है
और हम हैं
खोये खोये से

सरोज सिंह …….

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran