कुछ कही कुछ अनकही

सुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

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रंग बिखेरते कांच के दायरे .....................

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रंग बिखेरते कांच के दायरे
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बहुत अजीब है यह जिंदगी .न जाने कैसे कैसे रंग ,कैसे मौसम दिखातीं है , चाहे अनचाहे ,जाने अनजाने कुछ बीते पल .,कोई महक ,कोई धुन , किसी कविता की कोई पंक्ति ,कोई चेहरा एकदम न जाने कब यादों के झरोंखों से निकल दिल के दरवाजों पर दस्तक दे जाते हैं और हम अनजाने में वर्तमान को भूल गुजरे वक्त में जा पहुँचते है .
बहुत पहले अपने विद्यार्थी जीवन में में पढ़ी कुछ कवितायेँ और कहानियां मेरे जहन के किसी कोने में घर बनायें बैठी हैं बहुत वर्षों पहले सरोजिनी नायडू की इंग्लिश में लिखी कविता Bangle-sellers जब तब मेरे साथ आँख मिचौली खेलती रहती है .पहले पहल जब इसे पढ़ा था तो ज्यादा कुछ समझ में नहीं आया था .चूड़ियों के रंगों और उम्र का भी रिश्ता होता है यह मेरी समझ से परे था, कैसे कांच की यह चूड़ियाँ सतरंगी इन्द्रधनुष के रंगों को किसी के जीवन में बिखेर देती है इसका रहस्य मुझे काफी वर्षों बाद जीवन के विभिन्न पड़ावों से गु जरते हए समझ में आया.
मुझे आज भी कॉलेज का वो पहला दिन भुलाये नही भूलता जब मैंने मिस विभा को पहली बार देखा था .आर्गेनिक केमिस्ट्री का वो बेहद रुखा और नीरस विषय पढ़ाने के लिए जो शख्शियत हमारे हिस्से में आई उन्होंने न केवल इस रूखे से विषय को दिलचस्प बना दिया बल्कि उनका व्यक्तित्व इतना आकर्षक था कि हम सभी छात्र कभी उनका पीरियड मिस नहीं करते थे ..मिस विभा का एक खास अंदाज था उनकी सलीके से बंधी साड़ी और साड़ी से मैच करती हुई चूड़ियाँ .जितने भी रंग साड़ी में होते थे बिलकुल उसी अंदाज में उन्ही रंगों की चूड़ियाँ रोज उनकी कलाई में सजी होती थी काफी उम्र होने बावजूद मिस विभा अविवाहित थी .पर अपना यह शौक वो खूब निभाती थी .उनके हाथों में सजे उन इंद्रधनुषी रंगों को देखकर अक्सर मेरे जहन में उसी कविता की कुछ लाइन घूम जाती थी
Rainbow tinted circles of light
Lustrous tokens of radiant lives ,
सचमुच इनके चहरे पर हमेशा एक खुशनुमा चमक रहती थी जो क्लास के माहौल को भी हल्का और दिलचस्प बना देती थी
समय अपनी गति से चल रहा था .मिस विभा का असर मेरे दिलो दिमाग पर शायद कुछ अधिक ही हो गया था .उनके विषय में ही M .Sc करने के बाद शहर के कॉलेज में उसी विषय की लेक्चरर बन कर जैसे कोई सपना पूरा का लिया हो मैंने . इतना ही नही चूड़ियों की सौगात भी साथ आ गई थी और मैंने भी धीरे धीरे हर रंग की चूड़ियों को जमा कर लिया था .
ऐसे में एक दिन अम्मा ,बाबा को रिश्ते की बात करते सुना ..मेरे लाख मन करने के बाद भी रिश्ते की बात पक्की होने का समय आ ही गया और एक दिन सुधीर अपने परिवार के साथ हमारे घर आये .सुधीर सेना में captain थे . सब कुछ ठीक था दोनों परिवारों ने रिश्ते पर मुहर लगा दी .शादी की तारीख अभी दूर थी क्योंकि सुधीर एक नॉन फैमिली स्टेशन में पोस्टेड थे .उनकी की छुटियाँ खत्म हो रही थी और वापिस जाने से पहले मुझसे मिलने के लिए आग्रह किया .कॉलेज से छुट्टी ले ली थी .पहली बार किसी के साथ ऐसे बाहर जा रही थी .बहुत अजीब सा लग रहा था .पहली समस्या तो क्या पहनने की थी . अलमारी कपड़ों से भरी हो तब भी जाने क्यों कहीं जाना हो तो कुछ भी पसंद नहीं आता .बहुत असमंजस से गुजरते हुए आखिर एक सूट सेलेक्ट किया उससे मैच करती हुई accessories की खोज की .गई ,मैचिंग sandal ,पर्स,earings आदि के बाद कलाइयों में भी मेल खाती चूड़ियों को पहन कर आखिर मेरी तैयारी पूरी हुई .तभी सुधीर मुझे लेने आ पहुंचे .
कहाँ चलना है ?सुधीर ने पुछा .
आप decide करें.
ओके .
और हम शहर के एक बड़े मॉल की और चल पड़े .
ड्राइव के दौरान हल्की फुलकी बातों का सिलसिला बना रहा सुधीर ने मुझसे मेरी जॉब .hobbies .आदि के बारे में पूछ और अपने सैन्य जीवन के बारे में बताया .तब तक मेरी चुप्पी और संकोच खुले वार्तालाप में बदल चूका था .और मैंने अपने भावी जीवन साथी में सुलझे हुए इंसान को देखकर मन ही मन भगवांन को धन्यवाद दिया .
मॉल के cafetaria में कॉफ़ी पीने के लिए जाते वक्त मैंने देखा की सुधीर के हाथ में एक पैकेट था .शायद कोई तोहफा था मेरे लिए.
बातों बातों में काफी समय बीत गया .तब मुझे ख्याल आया और मैंने पुछा .
वापिस कब जा रहे हैं ?
अगले शनिवार को . सोमवार को on परेड होना है ..छुट्टी खत्म . सुधीर ने मुस्कराते हुए कहा पर उदासी की हल्की झलक भी कहीं थी ,जाहिर हैं घर छोड़ कर जाना किस को अच्छा लगता है ?
इतने कम समय में ही किसी से मिलकर कर बिछड़ना इतना दुखदायी होगा मुझे इसका जरा सा भी अंदाज़ा नही था .और शायद मेरी भावनाए सुधीर ने मेरे चेहरे पर पढ़ ली थी इसलिए बोले ,
अरे .फौजी की बीवी बनने जा रही हो, ऐसे कमजोर बनने से नहीं चलेगा .,come on be brave .
और मेरा हाथ की चूड़ियों को छु कर बोले .मुझे तुम्हारी कलाई में यह चूड़ियाँ बहुत अच्छी लगती हैं इनकी खनक मुझे जंगल के किसी झरने की याद दिला जाती है .सुधीर की यह बात सुनकर मुझे फिर उस कविता वो पंक्तियाँ याद आ गई जो सुधीर की सोच के साथ मेल खाती थी .
some are meet for a maiden ’s wrist
silver and blue as the mountain-mist ,
some are flushed like the buds that dream
on the tranquil brow of a wood land stream
.मैं इन्ही खयालों में खोई हुई थी तभी सधीर ने कहा
,देखो मैं तुम्हारे लिए कुछ लाया हूँ .
और पैकेट खोल कर एक खूबसूरत चूड़ियों का डब्बा निकाल कर टेबल पर रख दिया और बोले
पसंद आया ?
जब मेरी याद आये इसे खोलना और रंगबिरंगी चूड़ियाँ पहन लेना ,इनकी खनक में मेरी आवाज़ पाओगी और सारी उदासी दूर हो जाएगी .
बहुत सारी चूड़ियों से भरे , बम्बू से बने उस डब्बे में सुर्ख मखमली शनील की लाइनिंग लगी हुई थी .
बहुत सुन्दर हैं ,थैंक यू मैंने कहा.
सुधीर और मेरे बीच में चुडिया एक इतना सुन्दर रिश्ता बना देंगी इसका मुझे अंदाजा तक नहीं था .और एक बार फिर कांच के इन रंग बिरंगे दायरे मुझे उस कविता की याद दिला गए ,जो मेरे यादों के झरोखों से यदा कदा झलक दिखला जाती थी .
चूड़ियों का वो डब्बा भी मेरा अभिन्न साथी बन सदा मेरे साथ रहा .
हर दो साल होने वाले तबादलों के बवजूद मैंने उसे कभी भी अपने से अलग होने दिया.
कुछ महीनो बाद शादी की तारिख तय हो गई . बहुत गहमा गहमी थी .दिल में अपना घर छोड़ने की पीड़ा के साथ नए जीवन के सपने भी तैर रहे थी अज़ब सी हालत थी . समाज ने हम लड़कियों के साथ इतना बड़ा अन्याय किया है इसका अहसास भी शायद रीति रिवाज़ बंनाने वालों को कभी नहीं हुआ होगा .ऐसे ही उदास ख्यालों में खोई मैं आने कमरे में बैठी थी की अम्मा अंदर आई .
क्या हुआ इतनी उदास क्यों हो बिटिया ?
नहीं अम्मा .ऐसा कुछ नहीं हैं .आप बताइये .. अपने आंसू और उदासी को छुपाने की यह कला देकर ही भगवान ने शायद हर लड़की को धरती पर भेजा है यह सोचती हुए मैं मुस्कुरा दी .
यह आपके हाथ में क्या है ?
यह हरे कांच की चूड़ियाँ हैं ,कुछ रिवाज ,कुछ संस्कार निभाने का समय आ गया है ,बिटिया ,आज तुम्हारा इस घर में एक अविवाहित लड़की के रूप में अंतिम दिन है यह हरी चुडिया हैं जो मैं सुखी विवाहित जीवन दुआओं के साथ मैं तुम्हे आज पहनाऊॅंगी और कल ससुराल में तुम्हारी सास चूड़ीवाली को बुला कर इन्हे तुम्हे नए जीवन के शुभ आरम्भ ,अनंत सुहाग और खुशहा ली के आशीर्वाद के साथ लाल सुर्ख चुडिया तुम्हारी कलाई में सजा देंगी गीतों की गूंज के बीच,
अम्मा ,रिवाज तो ठीक है पर मेरी शादी के जोड़े के साथ यह हरी चूड़ियां मैच नही हो रही हैं
आँखों में बिटिया की विदाई की उदासी के साथ ही होंठो पर मुस्कराहट लाते हुए अम्मा बोली ,
”इन रंगों में जो प्यार और दुआएं छुपी है और एक गहरा मतलब भी छुपा है “‘ चलो अब मैं तुम्हे समझाती हूँ .
देखो हरा रंग खुशहाली का परिचायक है जो तुम्हे अब तक हमने देने की कोशिश की है और आगे भी मिले इसी इच्छा के साथ हर माँ अपनी बेटी को ससुराल भेजती हैं जहां तुम्हारी नई विवाहित जिंदगी की शुभ शुरुआत की रस्म के तौर पर सुर्ख रंगों से तुम्हे सजाना एक
रिवाज है . कल की सुबह तुम नए जीवन की शुरुआत करोगी ,नए रिश्ते बनेगे नई जम्मेदारियां आएंगी .विवाह की पवित्र अग्नि को साक्षी मान कर तरह यह लाल और सुनहरा रंग तुम्हे नई जिंदगी की शुभकामनायें देने का एक तरीका है . अम्मा की बात खत्म होते होते मेरा मन कहीं दूर खो गया था बीते समय और आने वाले अनजान पलों के बीच इन अनजान आशंका ने उसे घेर लिया था अपने कमरे की हर चीज़ उसे आज बीते वक्त की बातें याद दिला रही थी .किताबों की अलमारी को टटोलते हुए सामने कविता की किताबी हाथ में आ. गई पेज पलटते हुए अनजाने ही यह कुछ लाइन सामने थी जो मेरी आज की स्थति को बयान कर रही थी .
some ,like the flame of her marriage fire
or rich with the hue of her heart ’s desire ,
Tinkling ,luminous ,tender and clear ,
Like her bridal laughter and bridal tear
सचमुच आँखों में आंसू ,होंठो पर मुस्कान और दिल में नए सपनों के साथ एक अनकही आशंका को साथ ले कर ही एक लड़की दुल्हन बनकर नए घर नए परिवेश का हिस्सा बन जाती है.
उम्र के साथ सबकुछ बदलता जाता है बीतते साल हाथों को की रंगत भी बदल देते हैं अब उन उम्रदराज कलाइयों में सुर्ख सुनहरी नही बल्कि कुछ और ही रंग दिखाई देता है
some are purple and gold flecked grey ,
For her who has journeyed through life midway …

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
November 30, 2014

आदरणीय आपने वेहद खुबसुरत लेख लिखा है एक बार तो कालेज और मैम याद दिला दी काफी कुछ जानने को भी मिला आखिरी पैराग्राफ बहुत भावुकता से भरा हैं डॉ शोभा

    mrssarojsingh के द्वारा
    December 1, 2014

    आदरणीय डॉ शोभा जी आपने मेरा लेख पढ़ कर उस पर इतनी सुंदर प्रतिक्रिया दी .इसके लिए ढेरों धन्यवाद स्वीकार करें .. आप का साथ आगे भी बना रहेगा इसी उम्मीद के साथ सरोज

jlsingh के द्वारा
November 30, 2014

बहुत ही सुन्दर संस्मरण!…हरी हरी और लाल चूड़ियों का महत्व आज समझ में आया…..वैसे बहुत सरे फ़िल्मी गीत भी चूड़ियों और कलाइयों पर बने हैं… आपकी बीच बीच में अग्रेजी कविता की पंक्तियाँ मनभावन है …सादर!

    mrssarojsingh के द्वारा
    December 1, 2014

    आदरणीय जवाहर जी आपके शब्द मेरे लिए किसी इनाम से काम नहीं हैं ., ऐसे सुन्दर शब्दों के सहारे ही तो कुछ लिखने की हिमत बनी रहती है . अनेकों धन्यवाद स्वीकार करें …. सरोज


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