कुछ कही कुछ अनकही

सुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

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है भीड़ बहुत इस शहर की हर गली में यूँ तो .......

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है भीड़ बहुत इस शहर की हर गली में
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हैं भीड़ बहुत इस शहर की हर गली में यूँ तो /
इंसान एक भी नज़र फिर आता नहीं क्यूँ ?

रोशन है हर गली हर कूचा इस शहर का यूँ तो /
अजब सा एक अंधेरा हर दिल में छाया है क्यूँ ?

पहने है हर कोई रंगीन लिबास यूँ तो /
छाये हैं फिर चेहरों पे उदासियों के गहरे साये क्यूँ ?

छू लिया इंसान ने आसमां की हर बुलंदी को यूँ तो /
दिलों में इक दूजे के इतने फासले फिर आ गये क्यूँ /

कहने को है शांत बहुत, माहौल इस शहर का यूँ तो /
हर दिन ही आने को रहता तैयार इक नया तूफान क्यूँ /

ऊँची दीवारें, मजबूत दरवाजें हैं सारे हिफाजत के सामान यूँ तो /
आये दिन कई मासूमों का वज़ूद होता यहाँ फिर तार तार क्यूँ /

लड़ना होगा उनसे ही जो है चमन के पहरेदार यूँ तो /
कर दिया उन्होंने ही , तूफानों के हवाले चमन फिर अपना क्यूँ /

हक़ है हर रंग ,हर मज़हब, के इन्सां को जीने का यूँ तो /
भूल रहा फिर भी इंसानियत रोज के झगड़ों में आज का इंसान क्यूँ /

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
March 12, 2014

“रोशन है हर गली हर कूचा इस शहर का यूँ तो , अजब सा एक अंधेरा हर दिल में छाया है क्यूँ ?” सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया सरोज जी! आभार!

    mrssarojsingh के द्वारा
    March 12, 2014

    धन्यवाद संजय जी ,,आप जैसे वरिष्ठ और सुधी ब्लॉग मित्रों की सराहना से ही तो कुछ नया लिखने की प्रेरणा मिलती है …..और मिलती है कलम को रवानी ………. सादर आभार ….

    mrssarojsingh के द्वारा
    March 7, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद योगी जी ,,,आप जैसे वरिष्ठ रचनाकारों से अपनी रचना पर ऐसी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया बहुत अनमोल है ,यकीन मानिये अपने विचारों को साझा करने की हिम्म्त बढ़जाती है ऐसे ब्लॉग मित्रों का मार्गदर्शन पा कर ,, आभार ..

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 7, 2014

 आज कीतनाब पूर्ण,संवेदन हीन जिंदगी,भ्रष्ट मानसिकता एवं नैतिक मूल्य विहीन सामाजिक परिस्थिति का सटीक विश्लेषण करती है  कविता की हर पंक्ति ,बहुत उम्दा रचना सरोज जी .सादर बधाई

    mrssarojsingh के द्वारा
    March 7, 2014

    धन्यवाद निर्मला जी …आप का साथ मेरे लिए मार्ग दर्शन और प्रेरणा का स्त्रोत है … उम्मीद है आगे भी मिलता रहेगा … सादर आभार …

kavita1980 के द्वारा
March 5, 2014

बहुत सुन्दर भाव उतनाहीसुन्दर प्रस्तुतिकरण बधाई Permalink: http://kavita1980.jagranjunction.com/2014/03/05/प्रतिबद्ध-महिला-दिवस-पर-व/ Permalink: http://kavita1980.jagranjunction.com/2013/09/21/एक-सवाल

    mrssarojsingh के द्वारा
    March 6, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद आपका …मेरे प्रयास को पसंद किया आपने ….आभार


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