कुछ कही कुछ अनकही

सुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

174 Posts

167 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 13246 postid : 698968

फेर कर नज़रें चला गया जो ....(contest )

Posted On: 5 Feb, 2014 Others,कविता,Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

फेर कर नज़रें चला गया जो

फेर कर नजरें चला गया जो …
क्या पता उसको क्या क्या …
कहर उस एक पल में ढा गया वो …

_______
वो जो सबसे ज्यादा अपना होता है ….
न जाने क्यों वही सबसे ज्यादा ..
पराया भी होता है …

____________
रिश्तों के पुल कितने ,बेगानों के लिए बना डाले हमने …
वो जो सबसे करीब था किनारे खड़ा बस तकता रहा …
इक दुआ सलाम ,दो मीठे बोलों को तरसता रहा …

___________________
नई मंजिल नई राहों की खोज में निकले हैं जो ….
मंजिल तक पहुंचेंगे तभी वो …
खुद का पता मालूम हो जायेगा जिस पल उनको ….

___________________

सितम कर के हार गया वो ….
जब न बदले मेरे इरादे …
तो मेहरबां हो गया वो ……

_______________

दिल की तारों की झंकार से निकला जो नग़मा
प्यार का पैगाम होगा या …
होगा भूला हुआ दर्द का कोई अफसाना …

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
February 7, 2014

नई मंजिल नई राहों की खोज में निकले हैं जो …. मंजिल तक पहुंचेंगे तभी वो … खुद का पता मालूम हो जायेगा जिस पल उनको ….बहुत बेहतरीन रचना.दिल से निकले हुए शब्द.आपको बधाई और कॉन्टेस्ट के लिए शुभकामनाएं.

    mrssarojsingh के द्वारा
    February 7, 2014

    उत्साह वर्धन के लिये अापका बहुत बहुत धन्यवाद ।

kavita1980 के द्वारा
February 7, 2014

दिल के तारों की झंकार से निकला जो नगमा –बेहतरीन भावभिव्यक्ति

    mrssarojsingh के द्वारा
    February 7, 2014

    बहुत बहुत धन्यवाद । अाप सबके comments मिलते हैँ तो कलम को नई रवानी मिलती हैँ।खुद पर विश्वाश भी बढता है ।

Madan Mohan saxena के द्वारा
February 6, 2014

सुन्दर कभी इधर भी पधारें सादर मदन

    mrssarojsingh के द्वारा
    February 7, 2014

    धन्यवाद मदन जी,,, अाप जैसे अनुभवी ब्लाग लेखक तो मेरे लिये हमेशा ही मार्गदर्शक की भूमिका निभाते रहे हैँ ।।


topic of the week



latest from jagran