कुछ कही कुछ अनकही

सुर्खरुँ करेँ इन्सान को,जमाने की अाधिँयाँ,फजाँ-ए-जमीँ मेँ इतनी ता कत तो नहीँ।तुम समझे थे टूट जायेँगेँ ठोकरोँ से। इन्साँ हैँ हम कोई इमारत तो नहीँ।

184 Posts

169 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 13246 postid : 689252

खोली खामोशियों ने अपनी जुबां जिस दम.... शेरो /शायरी ....(contest )

Posted On: 18 Jan, 2014 Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

खोली खामोशियों ने अपनी जुबां जिस दम
=============================

बना लिया अपना ,जिन्दगी की मुश्किलोँ को जिस पल से मैँने..
दे गई न जाने कितनी नई राहोँ का पता, मेरे ही रास्ते की ठोकरें मुझे ..

————

दीये हैं अलग अलग तो क्या हुअा ,लौ तो सभी की एक है..
हो शमा चाहे किसी भी रगँ की ,नूर हर शमा का तो एक है..

———-

छु लिया तेरी साँसोँ ने मुझे जिस पल ,तोड़ दी मेरी परवाजोँ ने सारी हदेँ उसी पल..
मिट गये सारे शिकवे जुदाइयोँ के उसी दम , खोली खामोशियोँ ने अपनी जुबाँ जिस दम………

—————-

देख लिया नूर ये तेरे चेहरे का जिसने ,वो बस तेरा हो गया।
क्या जीना क्या मरना उसका फिर ,पता तेरा जिसने पा लिया।।

————–

रखना खुले दरवाजे ये दिलोँ के ,खिड़कियां वो दुअाअोँ वाली ..
बरसा दे क्या पता किस घड़ी, नेमत अपनी वो मुहब्बतोँ वाली
—————-

गहरे इस समन्दर की छोटी सी सिर्फ एक बूँद नहीँ हूँ मैँ..
समेट ले कभी खुद मेँ सारे समन्दर को भी जो, ऐसी एक बूदँ हूँ मैँ………

————–

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran